कौन सा आर्मेनियाई शरणार्थी ने विंस्टन चर्चिल की तस्वीर खींची और एक पोर्ट्रेट किंवदंती बन गया? सेलिब्रिटी कहानी: यूसुफ कर्श

कौन सा आर्मेनियाई शरणार्थी ने विंस्टन चर्चिल की तस्वीर खींची और एक पोर्ट्रेट किंवदंती बन गया? सेलिब्रिटी कहानी: यूसुफ कर्श

मज़ेदार खेल + रोचक कहानियाँ = खुशी से सीखते बच्चे! अभी डाउनलोड करें

क्या आपने कभी विंस्टन चर्चिल की गुस्से में तस्वीर देखी है? उनकी भौंहें चिढ़ी हुई हैं। उनके होंठ एक साथ दबे हुए हैं। वह एक बुलडॉग की तरह दिखते हैं। यह यूसुफ कर्श की तस्वीर है। कर्श ने यह तस्वीर 1941 में खींची थी। चर्चिल ने अभी एक भाषण दिया था। वह अच्छे मूड में नहीं थे। कर्श उनके पास गए और कहा, "मुझे माफ करें, सर।" फिर उन्होंने चर्चिल के मुँह से सिगार निकाल लिया। चर्चिल ने घूरा। कर्श ने अपनी कैमरा क्लिक की। यह तस्वीर इतिहास के सबसे प्रसिद्ध पोर्ट्रेट में से एक बन गई। यह सेलिब्रिटी कहानी: यूसुफ कर्श आपको एक ऐसे फोटोग्राफर से मिलवाएगी जो बचपन में आर्मेनिया से भाग गया था। वह 20वीं सदी के सबसे प्रसिद्ध पोर्ट्रेट फोटोग्राफर बन गए। उन्होंने सभी को फोटो खींचा: अल्बर्ट आइंस्टीन, अर्नेस्ट हेमिंग्वे, अल्बर्ट श्वाइट्ज़र, और जॉन एफ. कैनेडी।

आइए प्रकाश के मास्टर से मिलते हैं। यूसुफ कर्श का मानना था कि हर चेहरा एक कहानी बताता है।

यह सेलिब्रिटी कौन है?
यूसुफ कर्श एक आर्मेनियाई-कनाडाई पोर्ट्रेट फोटोग्राफर थे। उनका जीवन 1908 से 2002 तक था। उन्हें सभी समय के सबसे महान पोर्ट्रेट फोटोग्राफरों में से एक माना जाता है। उन्होंने 20वीं सदी के सबसे प्रसिद्ध लोगों की तस्वीरें खींची। उनके पोर्ट्रेट कनाडा के नेशनल गैलरी और न्यूयॉर्क के म्यूजियम ऑफ़ मॉडर्न आर्ट में हैं।

वह प्रसिद्ध क्यों हैं? उन्होंने विंस्टन चर्चिल का आइकोनिक पोर्ट्रेट खींचा। यह छवि फोटोग्राफी के इतिहास में सबसे अधिक पुनरुत्पादित पोर्ट्रेट है। यह लाइफ पत्रिका के कवर पर दिखाई दी। इसका उपयोग ब्रिटिश डाक टिकटों पर किया गया। यह द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश प्रतिरोध का प्रतीक बन गया। उन्होंने अन्य कई विश्व नेताओं, कलाकारों और वैज्ञानिकों की भी तस्वीरें खींची। उनके पास ओटावा, कनाडा में एक स्टूडियो था। विश्व नेता उनके पास आते थे।

प्रारंभिक जीवन और बचपन
यूसुफ कर्श का जन्म आर्मेनिया के मार्डिन में हुआ था। उनका परिवार आर्मेनियाई ईसाई था। ओटोमन साम्राज्य आर्मेनियाई लोगों का उत्पीड़न कर रहा था। उनका परिवार भाग गया।

वह डियारबकीर शहर में बड़े हुए। यह एक खतरनाक समय था। वह एक शांत लड़का था। उसे चित्र बनाना पसंद था। उसे पढ़ना पसंद था।

जब वह 14 साल का था, तो उसके परिवार ने उसे कनाडा भेज दिया। उसे अपने चाचा, जॉर्ज नकाश के साथ रहने के लिए भेजा गया। जॉर्ज शेरब्रुक, क्यूबेक में एक फोटोग्राफर थे। उनके पास एक छोटा स्टूडियो था।

यूसुफ ने अपने चाचा के लिए काम किया। उसने फोटोग्राफी की बुनियादी बातें सीखी। उसने फिल्म विकसित करना सीखा। उसने प्रिंट करना सीखा। उसने स्कूल भी गया। उसने अंग्रेजी सीखी।

उसमें प्रतिभा थी। उसके चाचा ने उसे प्रोत्साहित किया। उन्होंने उसे बोस्टन भेजा ताकि वह एक प्रसिद्ध पोर्ट्रेट फोटोग्राफर जॉन गारो के साथ प्रशिक्षुता कर सके। गारो भी एक आर्मेनियाई आप्रवासी थे। उन्होंने कर्श को प्रकाश के बारे में सिखाया। उन्होंने उसे पोज़िंग के बारे में सिखाया। उन्होंने उसे मनोविज्ञान के बारे में सिखाया। उन्होंने कहा, "आपको आत्मा को देखना सीखना चाहिए।"

शिक्षा और सीखने की यात्रा
यूसुफ कर्श ने जॉन गारो के साथ तीन साल तक प्रशिक्षुता की। गारो प्रकाश का एक मास्टर था। उसने बड़े, नरम प्रकाश स्रोतों का उपयोग किया। उसने ऐसे साए बनाए जो नाटक जोड़ते थे। कर्श ने उसकी तकनीकों को सीखा।

उन्होंने कला इतिहास का भी अध्ययन किया। उन्होंने रेम्ब्रांट और वेरमेयर के चित्रों को देखा। उन चित्रकारों ने मूड बनाने के लिए प्रकाश का उपयोग किया। उन्होंने उनके विचारों को उधार लिया।

1931 में, वह कनाडा लौट आया। उसने ओटावा में अपना खुद का स्टूडियो खोला। वह 23 साल का था। वह युवा था। वह अनजान था।

उसने स्थानीय राजनीतिज्ञों और व्यवसायियों की तस्वीरें खींची। उसने एक प्रतिष्ठा बनाई। वह सावधान था। वह धैर्यवान था। वह कुशल था।

1941 में, उसे बड़ा ब्रेक मिला। विंस्टन चर्चिल ओटावा आए। वह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री थे। वह कनाडाई संसद को संबोधित करने आए थे। कर्श ने एक सत्र का अनुरोध किया। उसे पांच मिनट दिए गए।

चर्चिल खुश नहीं थे। उन्होंने अभी बात की थी। वह थके हुए थे। उन्होंने मुस्कुराने से इनकार कर दिया। उन्होंने एक सिगार जलाया। कर्श ने इंतज़ार किया। फिर वह आगे बढ़े। उन्होंने कहा, "मुझे माफ करें, सर।" उन्होंने चर्चिल के मुँह से सिगार निकाल लिया। चर्चिल ने घूरा। कर्श ने शटर क्लिक किया। उसने उस क्षण को कैद कर लिया। यह तस्वीर दुनिया भर में प्रकाशित हुई। कर्श एक रात में प्रसिद्ध हो गए।

वे सफल कैसे हुए?
यूसुफ कर्श चर्चिल की तस्वीर के बाद सफल हो गए। उनका नाम विश्व स्तर पर जाना जाने लगा। विश्व नेता उनकी तस्वीरें खिंचवाना चाहते थे।

उन्होंने 1948 में अल्बर्ट आइंस्टीन की तस्वीर खींची। उन्होंने सही प्रकाश के लिए घंटों इंतज़ार किया। आइंस्टीन अधीर थे। वह अंततः बैठे। कर्श ने तस्वीर खींची। यह आइंस्टीन की बुद्धिमत्ता और थकान को दर्शाती है।

उन्होंने 1957 में अर्नेस्ट हेमिंग्वे की तस्वीर खींची। हेमिंग्वे एक प्रसिद्ध लेखक थे। वह एक शराबी भी थे। वह देर से आए। वह आक्रामक थे। कर्श धैर्यवान थे। उन्होंने अंततः तस्वीर खींची। यह हेमिंग्वे की ताकत और उसकी उदासी को दर्शाती है।

उन्होंने 1960 में जॉन एफ. कैनेडी की तस्वीर खींची। कैनेडी एक युवा सीनेटर थे। वह राष्ट्रपति के लिए दौड़ रहे थे। कर्श ने एक साधारण पोर्ट्रेट लिया। कैनेडी आत्मविश्वासी दिखते हैं। वह युवा दिखते हैं। यह तस्वीर चुनावी पोस्टरों पर उपयोग की गई।

उन्होंने इंग्लैंड की रानी की तस्वीर खींची। उन्होंने फिदेल कास्त्रो की तस्वीर खींची। उन्होंने अल्बर्ट श्वाइट्ज़र की तस्वीर खींची। उन्होंने पाब्लो पिकासो की तस्वीर खींची। उन्होंने 20वीं सदी के हर प्रमुख व्यक्ति की तस्वीर खींची।

उन्होंने कई किताबें लिखीं। उनकी सबसे प्रसिद्ध किताब "कर्श पोर्ट्रेट्स" है। इसमें उनके 100 से अधिक बेहतरीन चित्र शामिल हैं।

उन्हें कनाडा का ऑर्डर मिला। उन्हें ब्रिटिश साम्राज्य का ऑर्डर भी मिला। वह रॉयल फोटोग्राफिक सोसाइटी के फेलो थे।

बड़े विचार और उपलब्धियाँ
यूसुफ कर्श का सबसे बड़ा विचार यह था कि एक पोर्ट्रेट को आंतरिक व्यक्ति को प्रकट करना चाहिए। उन्होंने कहा, "पोर्ट्रेट आत्मा का एक दर्पण है।" उन्होंने केवल चेहरों की तस्वीरें नहीं खींचीं। उन्होंने चरित्र की तस्वीरें खींचीं।

उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि चर्चिल का पोर्ट्रेट है। वह एकल छवि एक कृति है। यह नाज़ी जर्मनी के खिलाफ ब्रिटेन के प्रतिरोध को कैद करती है। चर्चिल गुस्से में दिखते हैं। वह दृढ़ दिखते हैं। वह ऐसा दिखते हैं जैसे वह कभी हार नहीं मानेंगे।

एक और बड़ी उपलब्धि उनके काम का संग्रह है। उन्होंने 20वीं सदी का एक दृश्य इतिहास बनाया। जब हम याद करना चाहते हैं कि आइंस्टीन कैसे दिखते थे, तो हम कर्श को देखते हैं। जब हम हेमिंग्वे को याद करना चाहते हैं, तो हम कर्श को देखते हैं।

उन्होंने पोर्ट्रेट फोटोग्राफी पर भी प्रभाव डाला। उनके पहले, पोर्ट्रेट कठोर थे। लोग सीधे बैठते थे। वे कैमरे की ओर देखते थे। कर्श ने उन्हें आराम करने दिया। उन्होंने उन्हें खुद बनने दिया।

उनका ओटावा में स्टूडियो अब एक संग्रहालय है। आप इसे देख सकते हैं। आप उनकी कैमरे देख सकते हैं। आप उनकी रोशनी देख सकते हैं।

चुनौतियाँ और कठिन समय
यूसुफ कर्श ने कई चुनौतियों का सामना किया। पहले, वह एक शरणार्थी थे। उन्होंने अपने देश को छोड़ दिया। उन्हें एक नई भाषा सीखनी पड़ी। उन्हें एक नई जिंदगी बनानी पड़ी।

दूसरा, वह कई वर्षों तक अनजान रहे। उन्होंने संघर्ष किया। उन्होंने कड़ी मेहनत की। उन्होंने हार नहीं मानी।

तीसरा, उन्हें लगातार यात्रा करनी पड़ी। वह कई हफ्तों तक सड़क पर रहते थे। उन्होंने अपने परिवार को याद किया।

चौथा, उन्हें एक हृदय की समस्या थी। उनकी 60 के दशक में दिल का दौरा पड़ा। उन्होंने काम करना जारी रखा।

पाँचवां, उनकी मृत्यु 2002 में हुई। वह 93 वर्ष के थे। उन्होंने अपने लगभग सभी विषयों से अधिक जीवन जिया।

सेलिब्रिटी के बारे में मजेदार तथ्य
यूसुफ कर्श की ऊँचाई केवल पांच फीट थी। वह एक छोटे आदमी थे। उन्होंने दिग्गजों की तस्वीरें खींचीं।

एक और मजेदार तथ्य: उन्होंने 8x10 व्यू कैमरा का उपयोग किया। यह विशाल था। इसका वजन 50 पाउंड था।

वह उड़ने से डरते थे। वह ट्रेन से यात्रा करते थे।

उन्हें बागवानी करना पसंद था। उन्होंने गुलाब उगाए।

एक और तथ्य: उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक तस्वीर खींची। तब से हर प्रधानमंत्री की तस्वीर कर्श या उनके सहायकों ने खींची है।

यह सेलिब्रिटी आज क्यों महत्वपूर्ण है?
यूसुफ कर्श महत्वपूर्ण हैं क्योंकि उन्होंने हमें 20वीं सदी के चरित्र को दिखाया। जब आप उनकी तस्वीरों को देखते हैं, तो आप केवल चेहरों को नहीं देखते। आप आत्माओं को देखते हैं। चर्चिल का प्रतिरोध। आइंस्टीन की बुद्धिमत्ता। हेमिंग्वे का दर्द। कैनेडी की युवा।

वह अपने शिल्प के कारण भी महत्वपूर्ण हैं। उनके प्रकाश का उपयोग अध्ययन किया जाता है। उनकी पोज़िंग का अध्ययन किया जाता है। उनके धैर्य का अध्ययन किया जाता है।

उनका प्रभाव आज की पोर्ट्रेट फोटोग्राफी में देखा जाता है। हर फोटोग्राफर जो किसी व्यक्ति की सार्थकता को कैद करने की कोशिश करता है, वह कर्श का अनुसरण कर रहा है।

माता-पिता उनके कहानी का उपयोग बच्चों को धैर्य और तैयारी के बारे में सिखाने के लिए कर सकते हैं। कर्श ने सही क्षण के लिए घंटों इंतज़ार किया।

बच्चे इस कहानी से क्या सीख सकते हैं?
बच्चे यूसुफ कर्श से शक्तिशाली सबक सीख सकते हैं। पहले, धैर्य रखें। कर्श ने सही प्रकाश के लिए इंतज़ार किया। उन्होंने सही अभिव्यक्ति के लिए इंतज़ार किया। जल्दी मत करो। क्षण का इंतज़ार करें।

दूसरा, आत्मा की तलाश करें। कर्श ने केवल एक चेहरा नहीं देखा। उन्होंने एक व्यक्ति को देखा। जब आप एक पोर्ट्रेट बनाते हैं, तो उस व्यक्ति के अंदर के बारे में सोचें। वे क्या महसूस कर रहे हैं? वे क्या सोच रहे हैं?

तीसरा, जोखिम उठाएं। कर्श ने चर्चिल का सिगार लिया। वह बाहर फेंके जा सकते थे। उन्होंने जोखिम उठाया। उन्होंने तस्वीर ली।

अंत में, विनम्र रहें। कर्श ने कहा "मुझे माफ करें, सर।" वह सम्मानजनक थे। आप एक ही समय में साहसी और विनम्र हो सकते हैं।

त्वरित प्रश्नोत्तरी या अभ्यास समय
आइए देखें कि आपने इस सेलिब्रिटी कहानी: यूसुफ कर्श से क्या सीखा। इन सवालों के जवाब एक माता-पिता के साथ या अकेले दें।

करश ने किस प्रसिद्ध ब्रिटिश नेता की गुस्से में तस्वीर खींची?

करश ने बचपन में किस देश से भाग लिया?

करश ने तस्वीर लेने से पहले चर्चिल के मुँह से क्या निकाला?

करश का स्टूडियो कहाँ था?

करश ने बोस्टन में क्या अध्ययन किया जिसने उन्हें प्रकाश के बारे में सिखाया?

यहाँ एक मजेदार गतिविधि है। एक परिवार के सदस्य का पोर्ट्रेट लें। उनसे कुछ गंभीर सोचने के लिए कहें। उनसे मुस्कुराने के लिए न कहें। उनसे अपनी सोचने वाली चेहरे को दिखाने के लिए कहें। एक खिड़की से प्राकृतिक प्रकाश का उपयोग करें। आप यूसुफ कर्श की तरह फोटो खींच रहे हैं।

एक और गतिविधि। यूसुफ कर्श के अल्बर्ट आइंस्टीन के पोर्ट्रेट को देखें। आइंस्टीन की आँखों को देखें। वे थके हुए दिखते हैं। वे बुद्धिमान दिखते हैं। फिर किसी ऐसे व्यक्ति का पोर्ट्रेट बनाएं जिसे आप बुद्धिमान मानते हैं। आपके दादा-दादी। आपके शिक्षक। उनकी बुद्धिमत्ता को कैद करने की कोशिश करें।

यूसुफ कर्श एक आर्मेनियाई शरणार्थी थे। वह कनाडा भाग गए। उन्होंने अपने चाचा से फोटोग्राफी सीखी। उन्होंने बोस्टन में प्रकाश का अध्ययन किया। उन्होंने ओटावा में एक स्टूडियो खोला। उन्होंने विंस्टन चर्चिल की तस्वीर खींची। उन्होंने चर्चिल का सिगार लिया। उन्होंने चर्चिल की घूरने वाली नजर को कैद किया। यह तस्वीर प्रसिद्ध हो गई। उन्होंने सभी की तस्वीरें खींची: आइंस्टीन, हेमिंग्वे, कैनेडी। वह 20वीं सदी के सबसे महान पोर्ट्रेट फोटोग्राफर बन गए। उनकी कहानी हमें धैर्य रखना सिखाती है। आत्मा को देखना। जोखिम उठाना। विनम्र रहना। यही इस सेलिब्रिटी कहानी का असली पाठ है।